जगदलपुर। कहते हैं भाग्य एक बार दरवाजा खटखटाता है। यह बात बस्तर के मोगली के नाम से चर्चित चेंदरू पर सोलह आने सटीक बैठती है। सबसे पहले चेंदरू और उसके बाघ टेंबू को लेकर आठ भाषाओं में फिल्म बनाने वाले अर्न सक्सडार्फ और उनकी पत्नी एस्ट्रीज सक्सडार्फ ने चेंदरु को गोद लेने का निश्चय किया था किंतु पारिवारिक विवाद के चलते यह हो नहीं पाया। वहीं दूसरी तरफ चेंदरू के अभिनय के प्रशंसक तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने चेंदरू को दिल्ली में रख पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का वचन दिया था किन्तु दो साल बाद स्वीडन से भारत लौटे चेंदरू को उनके पिता जुगनू ने पढ़ाने से साफ इंकार कर दिया। इस तरह सुनहरे भविष्य की तरफ बढ़ रहे चेंदरू के पांव एकाएक अभावों से भरी जिंदगी की तरफ मुड़ गए और इन परिस्थितियों में ही वह इस दुनिया से विदा हो गया। चेंदरू मंडावी नारायणपुर के गढ़बेंगाल का रहने वाला था और बाल्यावस्था में ही वन्यजीव प्रेमी की भूमिका उनसे हालीवुड की फिल्म में निभाई थी। 18 सितंबर 2013 को चेंदरू का 78 साल की आयु में निधन हो गया।
